E.6 "गीता-ज्ञान, एक मनोयुद्ध या हिंसक युद्ध"
आज संसार ऐसी विशेष संकटमय स्थिति से गुज़र रहा है जब स्वयं भगवान इस धरा पर आकर इसके इतिहास को एक नया मोड़ देते हैं , फिर से ज्ञान देते हैं और मन को विषय-विकार तथा व्यक्त्तियों के मोह से निकाल , योगयुक्त्त बनने की प्रेरणा देते हैं !
दशरथ का राम लंका प्रस्थान से पूर्व शिव का आहवाहन (गौर करें शिव लिंग ध्यान किया शंकर का नही अर्थात शिव और शंकर में अंतर है) करते है। अगर खुद राम है तो किसको याद कर रहें हैं। आमतौर पर कोई सुभ कार्य से पूर्व अपने माता पिता से आशीर्वाद लिया जाता है अर्थात उस निराकार राम को याद किया जो उनका पिता है।