इसमें आत्मा का कभी भी नाश नहीं होता है और ना ही आत्मा के ऊपर प्रकृति का कोई प्रभाव पड़ता है अर्थात् न अग्नि उसे जला सकती है , न पानी उसको गीला कर सकता है, न हवा उसको सुखा सकती है , न तलवार उसको काट सकती है, आत्मा न कभी मरती है और न ही जन्म लेती है, यह अजन्मा, अविनाशी, शाश्वत और आदि युगीन है !
दशरथ का राम लंका प्रस्थान से पूर्व शिव का आहवाहन (गौर करें शिव लिंग ध्यान किया शंकर का नही अर्थात शिव और शंकर में अंतर है) करते है। अगर खुद राम है तो किसको याद कर रहें हैं। आमतौर पर कोई सुभ कार्य से पूर्व अपने माता पिता से आशीर्वाद लिया जाता है अर्थात उस निराकार राम को याद किया जो उनका पिता है।