E.6 परमात्मा पुनः धरा पर अवतरित हो चुके हैं ?

इसी तरह आज संसार ऐसी विशेष संकटमय स्थिति से गुज़र रहा है जब स्वयं भगवान इस धरा पर आकर इसके इतिहास को एक नया मोड़ देते हैं , फिर से ज्ञान देते हैं और मन को विषय-विकार तथा व्यक्त्तियों के मोह से निकाल , योगयुक्त्त बनने की प्रेरणा देते हैं !

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आज संसार ऐसी विशेष संकटमय स्थिति से गुज़र रहा है जब स्वयं भगवान इस धरा पर आकर इसके इतिहास को एक नया मोड़ देते हैं , फिर से ज्ञान देते हैं और मन को विषय-विकार तथा व्यक्त्तियों के मोह से निकाल , योगयुक्त्त बनने की प्रेरणा देते हैं !

गीता ज्ञान का आध्यात्मिक रहस्य (पहला और दूसरा अध्याय)

“गीता-ज्ञान, एक मनोयुद्ध या हिंसक युद्ध” 

The Great Geeta Episode No• 006

E.6 परमात्मा पुनः धरा पर अवतरित हो चुके हैं ?
  • आज के समाज में भी अगर देखा जाए तो शकुनी जैसे पात्र देखने को मिलते हैं !
  • महाभारत के समय तो शायद एक ही शकुनी था, परन्तु आज के समाज में तो कितने शकुनी हो गए हैं, हर मोड़ पर एक शकुनी बैठा है ! जो कई परिवार के बीच फूट डालता रहता है !
  • समाज में शकुनी जैसे पात्र अर्थात् विकर्म तथा कुकर्म के प्रति अंधा समाज जो धर्म-अधर्म , कर्तव्य-अकर्तव्य , भलाई-बुराई न्याय-अन्याय को परखने वाले चक्षु नहीं रखते हैं !

  • कई बार ऐसे शकुनी का साथ देने के लिए भी लोग चल पड़ते हैं या आगे बढ़ जाते हैं ! ऐसा आज का समाज होता जा रहा है !
  • कई बार सामाजिक परिस्थितयाँ भी हमारे सामने इस प्रकार से आ जाती हैं कि हमें समझ में ही नहीं आता कि इसे पार कैसे किया जाए ?
  • ऐसी सामाजिक परिस्थिति का समाधान भी श्रीमदभगवदगीता में मिलता है !
  • साथ ही साथ जैसा कहा जाता है कि इसमें हमें एक राष्टीय स्थिति का समाधान भी प्राप्त होता है धृतराष्ट का विवरण इस प्रकार है- धृतराष्ट अर्थात् जो राष्ट्र को धृत भावना से हड़प कर बैठा है बाहुबल से अपना अधिकार जमाए हुए है, जो सत्य की दृष्टि से अंधा है !
  • जहाँ मानसिक और आत्मिक-अंधत्व प्रकट होता जा रहा है ! जब इस प्रकार की स्थिति आ जाती है, तब परमात्मा को आकर के इसका समाधान देना पड़ता है !
  • इसी तरह आज संसार ऐसी विशेष संकटमय स्थिति से गुज़र रहा है जब स्वयं भगवान इस धरा पर आकर इसके इतिहास को एक नया मोड़ देते हैं, फिर से ज्ञान देते हैं और मन को विषय-विकार तथा व्यक्त्तियों के मोह से निकाल, योगयुक्त्त बनने की प्रेरणा देते हैं !
  • आज ये संसार जिस तरह से अनेक समस्याओं की स्थिति से गुज़र रहा है, उसमें कई बार मनुष्य की स्थिति कितनी संकटमय बन जाती है !
  • इस कारण से वो परिस्थितयों का शिकार बनता जा रहा है ! जिसको लेकर कितने युद्ध इस संसार में होने लगे हैं !
  • जब अर्धम अपनी चरम सीमा को प्राप्त कर लेता है, हर प्रकार की बुराइयां संसार में अति में चली जाती है, ऐसी अति की स्थिति को परिवर्तन करने के लिय भगवान को दिव्य और अलौकिक जन्म लेकर, गीता ज्ञान अनुसार वे अपने किये हुए वायदे को निभाने के लिए इस संसार में अवतरित होते हैं !
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