Geeta E•27 श्रीकृष्ण जो व्यक्त्त स्वरूप अर्थात् साकार स्वरूप था " उस व्यक्त्त स्वरूप में , मैं अव्यक्त्त रूप में प्रवेश होता हूँ ! इसलिए गीता में कहीं भी श्रीकृष्णवाच् नहीं आता है , " भगवानुवाच " आता है !
दशरथ का राम लंका प्रस्थान से पूर्व शिव का आहवाहन (गौर करें शिव लिंग ध्यान किया शंकर का नही अर्थात शिव और शंकर में अंतर है) करते है। अगर खुद राम है तो किसको याद कर रहें हैं। आमतौर पर कोई सुभ कार्य से पूर्व अपने माता पिता से आशीर्वाद लिया जाता है अर्थात उस निराकार राम को याद किया जो उनका पिता है।