कहा जाता है कि मनुष्य जन्म बहुत ही अनमोल होता है।

कुछ लोगों का मानना तो यह भी है की मनुष्य रूपी जन्म सिर्फ़ एक ही बार होता है..और दूसरी तरफ़ कहा जाता है ये जो अनमोल है ना..जिसका नाम जीवन है ..उसको परिभाषित संघर्ष के रूप में किया गया है…

“जीवन एक संघर्ष है”

और जब जीवन का नाम ही संघर्ष है तो ज़ाहिर सी बात है की अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए कुछ करने के लिए.. या यूँ कह लो की अपने कर्मों का हिसाब पूरा करने के लिए भी आपको अपने जीवन में बहुत सी अच्छी स्तिथि के साथ बहुत से बुरी परिस्तिथियो का बहुत से कष्टों का भी सामना करना होगा..बहुत सी मुसीबतों से लड़ना होता है।

हम सभी ईश्वरीय संतान है और ईश्वर ने इन मुसीबतों से लड़ने के लिए सामना करने के लिए ही परमात्मा ने आपको बल्कि हम सभी को एक शक्ति दी है। जिसका नाम है..

“साहस”

हिम्मत ..जो परमात्मा ने हर मनुष्य में दी है बस फ़र्क़ ये है की कोई इसे समझता है और कोई नही..

जिसने भी अपने अंदर समाहित इस शक्ति को पहचान लिया वह अपने जीवन रूपी मार्ग में आने वाली हर कठिनाइयों से लड़ सकता है..
जीवन में बहुत सी मुसीबतें, कष्ट आते है ऐसा कौन व्यक्ति है जो जीवन में पूर्ण रूप से सुखी है? श्याद ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है..।
सभी के जीवन मे कोई ना कोई अभाव रहा ही है चाहे वह कोई धनवान हो या निर्धन।

•महत्वपूर्ण तथ्य•

  • हम वर्तमान समय देख रहे की कई लोग अपनी इस आत्मिक शक्ति को समझ नही पाते है और परिणाम स्वरूप समस्याओं से झुलस कर मुसीबतों से लड़ नही पाते !उस समय अपनी आत्मिक शक्ति “साहस “को एक शस्त्र के रूप में प्रयोग ना करते हुए — अपने ही शरीर पर ही मौत रूपी शस्त्र (हथियार) का प्रयोग कर बैठते है अर्थात् “आत्महत्या”—
  • जिसका परिणाम उन्हें मरने के बाद भी तब तक भोगना पढ़ता है जब तक उस आत्मा को नया शरीर रूप वस्त्र धारण करने का समय ना आ जाए..तब तक उसे आत्मा के रूप मे ही भटकना होता है..
  • कहते है ना जीते जी मरना आसन है..सुलझा जा सकता है पर मर कर जीना एक एक क्षण मौत के बराबर है..
  • आज इस तरह की बातें (आत्महत्या जैसी)बहुत सुनी जा रही है ..इसलिए हमे अपनी आत्मिक शक्ति साहस को जाग्रत करना होगा और अपनी परेशानी एवं समस्या का सामना अपनी साहस रूपी शक्ति से करना होगा..अपने अंदर की इस ऊर्जा को जाग्रत करो एवं समय आने पर इसका उपयोग करो..
  • जीवन में कुछ पाना है कुछ करना है तो रिस्क को उठना होगा यूँ सोचो की हम तो मनुष्य मात्र है यहाँ तो ईश्वर भी जब तक थे संघर्ष किया..ना की आत्म संहार..
    आत्म की हत्या का सोचना मतलब परिस्तिथ्यो से भगाना ओर हार मान लेना..
  • जो व्यक्ति साहस की पावर को समझ लेता है वह दुनिया को बदलने की ताक़त रखता है। वह सबसे अलग प्रतीत होता है..
  • साहस इंसान की सबसे बड़ी ऊर्जा है यदि ये नही तो आप हर पल अंजाना डर का अनुभव करेंगे तथा ये इतना बड़ा रूप ले लेगा की आप कुछ भी नही कर पाएँगे
    साहसी व्यक्ति कभी यह नही सोचता की लोग क्या कहेंगे

“कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना”

आप लोगों की मत सोचिए उन्होंने तो ईश्वर को भी नही छोड़ा बस अपने सत्कर्म कीजिए ओर गलत का सामना
आत्मरक्षा हमारा स्वधर्म है इसे बखूबी निभाए
अपने हर कर्म में ये मत सोचिए की ..
सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग”

   “अपने हर कर्म में सोचिए की वो (परमात्मा) क्या कहेंगे “

तो कभी आप गलत कर ही नही पाएँगे..ओर बखूबी अपना किरदार निभाएँगे।

मेरा मानना तो यह है की बिना साहस के जीवन में कुछ भी पाना असम्भव है साहसी जीवन हमेशा सफलता को पाता है

साहस को जितना बड़ाओगे उतना बढ़ता जाएगा ।हिम्मत से काम लीजिए सामना कीजिए हर विकट परेशानी का ..

एवं उन लोगों तक ये बात अवश्य पहुँचाइए जिनके दिल कच्चे है..जो ये कहते है की अब तो मर जाना ही बेहतर है या अब तो मौत मिल जाए……नही..क्यू मिल जाए? इसे मरना नही भगाना कहते है..लड़ो ,सामना करो आप लोगों को भगवान ने आत्मिक शक्ति दी है एक शस्त्र के रूप में उसे जगाइए !मरना नही बल्कि मारना है मुसीबतों को।

वैसे मरना तो एक दिन सभी को है तो जब ऊपर से निमंत्रण आए तभी जाना चाहिए बिन बुलाए (आत्महत्या करके) क्यू जाना कही? चाहे वो भगवान ही का घर क्यू ना हो?

जब जाओ साहसी बन के जाओ सम्मन के साथ जाओ कुछ करके जाओ । ऐसे जाओ की हम भी खुदा से नज़रें मिला के मुस्कुरा सके। ताकी भगवान भी आपका स्वागत करे ओर आपके लिए कहे….Brave Boy/Brave Girl…..

हrshi ठाkur ✍️

मै धर्म व अध्यात्म की कड़ी, ईश्वरीय मत व प्रेरणा के अधीन हूँ। निरक्षर को शिक्षा देना व अध्यात्म के प्रति जागरूक करना है इसलिए 15 वर्षों से शिक्षिका हूँ। जीवन का उद्देश समाज सेवा एवं अध्यात्म सेवा है इसी को मै अपना परमसौभाग्य मानती हूँ।
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